बरौनी थर्मल के आधुनिकीकरण को 496 करोड़

21 जनवरी 2010. स्वर्ण जयंती वर्ष के मौके पर बरौनी थर्मल पावर प्लांट की आधुनिकीकरण योजना को मंजूरी दे दी गई है। उल्लेखनीय है कि 26 जनवरी, 2010 को बरौनी थर्मल पावर प्लांट के 50 वर्ष पूरे हो जायेंगे।

बरौनी थर्मल पावर के महाप्रबंधक अविनाश कुमार के अनुसार केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय व योजना आयोग ने 496 करोड़ की लागत से इस पावर प्लांट को अत्याधुनिक बनाने की योजना की मंजूरी प्रदान कर दी है।

योजना के अनुसार दो वर्ष में 220 मेगावाट (110&2) की यूनिट को अत्याधुनिक बनाने की योजना है। जिसके तहत पहले यूनिट संख्या-7 फिर यूनिट संख्या-6 में कार्य आरंभ होगा। आधुनिकीकरण का कार्य भेल को सौंपा गया है।

यही नहीं बरौनी थर्मल पावर में 500 मेगावाट (250&2) की यूनिट लगाने की तैयारी चल रही है। जिसे अनापत्ति प्रमाण पत्र भी दे दिया गया है।

गौरतलब है कि 26 जनवरी,1960 को तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह ने तीन यूनिटों (15&3) का शिलान्यास किया था। जिसकी दो यूनिटों से 1963 में तथा एक से 1966 में बिजली उत्पादन शुरू किया जा सका। उस समय युगोस्लाविया के सहयोग से 45 मेगावाट (15&3) की यूनिटें लगायी गयी थी। वहीं पोलैंड के सहयोग से 1969 में 50 मेगावाट तथा फिर 1972 में 50 मेगावाट की यूनिट से उत्पादन शुरू हुआ।

इस प्रकार बरौनी थर्मल पावर की क्षमता 145 मेगावाट हो गयी थी। 1983 में भेल ने 220 (110&2) मेगावाट का यूनिट लगाया और 1985 से बिजली उत्पादन शुरू कर दिया। उत्पादन शुरू होने के बाद प्रारंभिक 15 यूनिट की तीनों इकाइयों से 1985 में उत्पादन बंद कर दिया गया। इस तरह से बरौनी थर्मल की क्षमता 320 मेगावाट हो गयी। 1965 में लगे 50-50 मेगावाट की दो इकाइयों को 1995-96 में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के हस्तक्षेप के बाद बंद कर दिया गया। 2003-04 में यहां से उत्पादन बंद हो गया। दो वर्ष पूर्व यहां फिर से उत्पादन शुरू कर दिया गया। (स्रोत-दैनिक जागरण)

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