04 जनवरी, 2010. छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित अनेक बिजली परियोजनाओं पर अब खतरा मंडराने लगा है। पर्यावरण मंत्रालय ने राज्य में कई कोयला खदानों को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। राज्य सरकार की ओर से इस मुद्दे को उठाने के बाद अब प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस मसले पर सचिवों की एक समिति बनाई जा रही है। इसमें ऊर्जा, कोयला और पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा।
दरअसल, कोयला मंत्रालय ने करीब 18 कोयला ब्लॉक बिजली कंपनियों के लिए आवंटित किए थे। इनमें से करीब 14 ब्लॉक बिजली कंपनियों को मिले थे। हालांकि, इनमें से करीब छह ब्लॉकों पर पर्यावरण मंत्रालय ने आपत्ति जताई है।
सूत्रों के मुताबिक इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस मसले पर ऊर्जा, कोयला और पर्यावरण मंत्रालय की एक समिति बनाने को कहा गया है जो इस मसले को देखेगी। सचिव स्तर की इस समिति को अगले कुछ महीनों में अपनी रिपोर्ट देनी होगी। सूत्रों के मुताबिक जिन कोयला खदानों पर रोक लगाई गई है उनमें नाकिया एक, नाकिया दो और मदनपुर तारा कोयला ब्लॉक भी शामिल हैं। मदनपुर तारा कोयला ब्लॉक तो छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को मिला था। इसमें खुदाई करके राज्य बिजली बोर्ड को प्रस्तावित प्रोजेक्ट के लिए ईंधन का बंदोबस्त करना था।
जिन कंपनियों के प्रोजेक्ट इस रोक से प्रभावित हुए हैं उनमें इंडिया बुल्स एनर्जी और गुजरात मिनरल डेवलमेंट कॉरपोरेशन शामिल हैं। राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह के मुताबिक राज्य में सिर्फ 37 फीसदी भूमि ही कृषि के लिए उपलब्ध है, जबकि राज्य का 44 फीसदी हिस्सा वन से घिरा है। ऐसे में राज्य के विकास के लिए कोयला खदानों को विकसित करना जरूरी है जिस पर पर्यावरण मंत्रालय ने रोक लगा दी है।(स्रोत-दैनिक भास्कर)
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