08 फरवरी 2010. इस्पात मंत्रालय ने इंटरनेशनल कोल वेंचर्स लिमिटेड में नई जान फूंकने के अपने प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि अगर कोल इंडिया तथा एनटीपीसी विदेशों में कोयला संपत्तियां खरीदने की इच्छा नहीं रखती तो इस कम्पनी से अलग हो सकती हैं।
इस्पात मंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि मामला यही है कि कोल इंडिया या एनटीपीसी इसमें (आईसीवीएल) में शामिल होना चाहती हैं या नहीं। अगर वे इसमें भाग नहीं लेना चाहतीं तो हट सकती हैं। यह बड़ा उद्यम है। अगर कोई हटना चाहता है तो हट सकता है। आईसीवीएल एक विशेष उद्देशीय कोष है जिसकी स्थापना सेल, एनटीपीसी, कोल इंडिया, एनएमडीसी तथा आरआईएनएल ने विदेशों में कोयला संपत्तियों के अघिग्रहण के लिए की थी। यह अलग बात है कि यह कम्पनी बीते दो साल में इस दिशा में कोई बड़ी पहल नहीं कर सकी है। आईसीवीएल इस्पात मंत्रालय के अधीन आती है जबकि सेल, आरआईएनएल व एनएमडीसी इस्पात मंत्रालय, एनटीपीसी बिजली मंत्रालय तथा कोल इंडिया कोयला मंत्रालय के अधीन आती है।(स्रोत-पत्रिका.कॉम)
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