रंग नहीं ला रहे हैं कंपनियों के समझौते

08 फरवरी 2010, सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी एनएमडीसी इन दिनों निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ साझेदारी करने में जोर-शोर से जुटी है।


पिछले महीने कंपनी ने खनिज और स्टील उत्खनन के लिए टाटा स्टील के साथ समझौता किया था। पिछले दो साल के दौरान कंपनी की ओर से तीसरी निजी कंपनी के साथ करार किया गया है।

वर्ष 2008 में एनएमडीसी ने स्पाइस एनर्जी के साथ 50-50 फीसदी की साझेदारी में एनएमडीसी स्पाइस इंटरनैशनल नाम से संयुक्त उद्यम के लिए करार किया था। इसका मकसद विदेशी अधिग्रहण और परियोजना की संभावना तलाशना था। हालांकि दो साल बीतने के बाद संयुक्त उद्यम का गठन अब तक नहीं हो पाया है।

एनएमडीसी के सूत्रों ने बताया कि परिसंपत्तियों के गठन के बाद संयुक्त उद्यम का गठन किया जाना था। लेकिन अभी तक कंपनी ने इसके लिए किसी भी परिसंपत्ति को लेकर र्कोई अंतिम फैसला नहीं किया है।

स्पाइस एनर्जी के साथ समझौता करने के कुछ महीनों के अंदर ही एनएमडीसी ने दुनिया की प्रमुख रिसोर्सेस कंपनी रियो टिंटो के साथ करार किया। इसके तहत भारत और विदेश में लौह अयस्क क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को तलाशना था।

इस समझौते के बारे में जब रियो टिंटो के प्रबंध निदेशक निक सेनापति से बात की गई तो उन्होंने इसकी स्थिति के बारे में बताने से इनकार कर दिया। ऐसा केवल एनएमडीसी के साथ ही नहीं है कि समझौता करने के बाद कंपनी आगे नहीं बढ़ती है, बल्कि कई अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हैं, जो समझौता तो करती हैं, लेकिन उसका परिणाम उम्मीद अनुसार नहीं आता है।

वर्ष 2004 में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने भारत और विदेश में कोयला और लौह अयस्क खानों को विकसित करने के लिएए बीएचपी के साथ करार किया था। लेकिन इस पर भी अब तक आगे नहीं बढ़ा जा सका है। एमओयू के स्थिति के बारे में सेल के चेयरमैन एस के रुंगटा ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।

सेल ने 2007 में पोस्को के साथ रणनीति साझेदारी के लिए समझौता किया था। हाल के साल में इसमें सीमित प्रगति देखी गई। सूत्रों का कहना है कि पोस्को के साथ साझेदारी अब तक रंग नहीं लाई है। 2008 में सार्वजनिक क्षेत्र की स्टील कंपनी ने टाटा स्टील के साथ 50-50 फीसदी की हिस्सेदारी वाले संयुक्त उद्यम का गठन किया। इसका मकसद कोयले की खानों को विकसित करना था।

पिछले दो साल में टाटा स्टील और सेल का संयुक्त उद्यम ने एऐंडटी माइनिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड का गठन करने में सफल रही। रुंगटा ने कहा कि इस कंपनी को कोल इंडिया ने बंद पड़े 9 संयंत्रों के साथ ही विकसित करने के लिए चुना है। उद्योग जगत के सूत्रों का कहना है कि नौकरीशाही और निर्णय लेने में देरी के चलते सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के साथ काम करना थोड़ा कठिन है।

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