18 फरवरी 2010. सरकार ने लघु, छोटे और मझोले उद्योगों को मदद देने की कवायद शुरू कर दी है। अब सरकारी कंपनियों [पीएसयू] को अपनी कुल खरीद का 20 प्रतिशत इन उद्यमों से खरीदना पढ़ेगा। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग [एमएसएमई] मंत्रालय इस आशय का एक कैबिनेट नोट भी तैयार कर रहा है।
मंत्रालय के इस प्रस्ताव के तहत रेलवे और रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की सभी यूनिटों को अपनी कुल खरीद का 20 प्रतिशत लघु और मझोले उद्योगों से लेना होगा। हाल में सरकार ने खरीद नीति में आम सहमति बनाने के लिए सचिवों की एक कमेटी भी गठित की थी। पिछले सप्ताह 11 फरवरी को कैबिनेट सचिव केएम. चंद्रशेखर की अध्यक्षता में सचिवों की समिति ने खरीद नीति पर अपनी सहमति भी जताई है।
हालांकि यह नीति फिलहाल तीन साल के लिए बनाई जाएगी। उसके बाद समीक्षा करके तय किया जाएगा कि इसे आगे जारी रखा जाए या नहीं।
एमएसएमई के तहत डिजाइन उपचार केंद्र योजना का शुभारंभ करते हुए मंत्रालय के सचिव दिनेश राय ने बुधवार को कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि लघु व मझोले उद्योगों के उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ही खपा लें।
यही नहीं एमएसएमई के उत्पादों के डिजाइन में सुधार कर उन्हें और आकर्षक तथा सुविधाजनक बनाने के लिए भी केंद्र ने पहल की है। इससे इन उद्यमों के उत्पादों की गुणवत्ता तो सुधरेगी ही, इनके माल की बेहतर पैकेजिंग भी की जा सकेगी। राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पद्र्धा सुधार कार्यक्रम के तहत उद्यमियों को राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान [एनआईडी] जैसी संस्था का मार्गदर्शन और सेवा मिल सकती है। इसके लिए डिजाइन क्लीनिक यानी डिजाइन उपचार केंद्र स्थापित करने की योजना है। डिजाइन क्लीनिक योजना का मकसद एमएसएमई के उत्पादों को प्रतिस्पर्द्धी, पर्यावरण अनुकूल और आकर्षक बनाना है।
जहां केंद्र ने इन उद्यमों के हित में पहल की है, वहीं कुछ सरकारी विभागों ने एमएसएमई के उत्पादों की गुणवत्ता पर चिंता भी जताई है। हालांकि, जानकारों के मुताबिक सरकारी खरीद में लघु एवं मझोले उद्योगों की हिस्सेदारी महज पांच प्रतिशत यानी 8 हजार 500 करोड़ रुपये की है। सरकार अगर खरीद नीति के सुझावों को मान लेती तो इन उद्योगों की बिक्री बढ़कर लगभग 34 हजार करोड़ रुपये हो जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में छाई मंदी से छोटे एवं मझोले उद्योगों को बाहर निकालने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सितंबर, 09 को प्रमुख सचिव टीकेए. नायर की अध्यक्षता में एक कार्यबल गठित किया था। इन उद्योगों के लिए गठित कार्यबल ने हाल में अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपी है। रिपोर्ट में भी कार्यबल ने सरकारी कंपनियों की खरीद में लघु व मझोले उद्यमों की हिस्सेदारी बढ़ाने की सिफारिश की थी।
देश में कृषि क्षेत्र के बाद सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदान करने वाला क्षेत्र है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार इस क्षेत्र में चल रहे करीब लाखों उद्यमों में 5 करोड़ 97 लाख लोगों को रोजगार मिला है।(स्रोत-दैनिक जागरण)
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