अब सेटेलाइट से होगी खनिज परिवहन की निगरानी

05 मार्च 2010. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने खनिज विभाग के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर देते हुए खनिज परिवहन की सेटेलाइट से निगरानी करवाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए खदान क्षेत्रों से खनिज परिवहन करने वाले ट्रकों पर दूर-संवेदी भू उपग्रह (सेटेलाइट) आधारित ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) के उपकरण लगवाने के निर्देश दिए।

छत्तीसगढ़ खनिज विकास निधि सलाहकार की बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि कोयला, बाक्साइट ओर लौह अयस्क जैसे बहुमूल्य खनिजों की तस्करी की आशंकाओं को समाप्त करने के लिए आधुनिक तरीके से निगरानी की जाए। उन्होंने अफसरों से कहा कि निगरानी केलिए कार्ययोजना बनाकर खनिज परिवहन कर्ताओं के वाहनों में एक साल के भीतर जीपीएस सिस्टम लगवा दें।

उन्होंने खनिज जांच चौकियों में क्लोज सर्किट कैमरा लगवाने के लिए भी प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। राज्य की 45 जांच चौकियों में प्रथम चरण में कम से कम 10 में प्रायोगिक तौर पर उपकरण लग जाने चाहिए।

डॉ. सिंह ने कहा कि राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 10 हजार से अधिक राशन दुकानों तक सामग्री पहुंचाने वाले वाहनों पर जीपीएस सिस्टम से निगरानी की बेहतर व्यवस्था की गई है। इसमें राशन सामग्री के परिवहन और सप्लाई में विलंब की शिकायतें काफी हद तक कम हुई हैं।

ऐसी व्यवस्था खनिज विभाग की गाड़ियों में भी की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम दक्षिण-पूर्वी कोयला प्रक्षेत्र लिमिटेड (एसईसीएल) को भी कहा जाएगा कि वे अपने कोयला खदान क्षेत्रों में कोयले का परिवहन करने वाले ठेकेदारों को उनके ट्रकां में जीपीएस सिस्टम लगवाएं।

सलाहकार समिति की बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम की कोयला, लौह अयस्क, टिन अयस्क की परियोजनाओं के लिए 58 करोड़ 52 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई।

उल्लेखनीय है कि राज्य में प्रत्येक वर्ष खनिज राजस्व का पांच प्रतिशत छत्तीसगढ़ खनिज विकास निधि के लिए निर्धारित किया जाता है। आज की बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एन. बैजेंद्र कुमार, खनिज सचिव आरएस विश्वकर्मा, संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म एसके त्रिवेदी समेत संचालनालय के अन्य अफसर मौजूद थे।(स्रोत-दैनिक भास्कर)

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