अब स्टील की कीमतें बढ़ेंगी

11 मार्च 2010, आने वाले समय में मकान बनाना और भी महंगा हो सकता है। बजट में एक्साइज ड्यूटी बढ़ने के बाद स्टील कंपनियों को वैसे भी कीमतें बढ़ाना का मौका मिल गया है।

अब मार्केट और इकोनॉमी में रिकवरी के और स्टील की डिमांड में बढ़ोतरी को देखते हुए कंपनियां फिर कीमतें बढ़ाने की रणनीति बनाने में जुट गई है। ऐसे में आशंका है कि अगले वित्त वर्ष 2010-11 के पहले माह, अप्रैल से स्टील के दाम में फिर से बढ़ोतरी शुरू हो सकती है। यह बढ़ोतरी 25 से 30 फीसदी तक की हो सकती है।

इस बात के संकेत टाटा स्टील के प्रभार (सेल) अमिताभ पांडा ने दी। एक कार्यक्रम में शिरकत करने आए पांडा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, अयस्क और कोकिंग कोल जैसे कच्चे माल की कीमतों में 25 तक फीसदी का इजाफा होने की संभावना है। अगर कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी होगी तो इसका असर स्टील की कीमतों पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि भारत में इकोनॉमी और माकेर्ट दोनों अब रिकवरी की राह में तेजी के साथ आगे बढ़ रहे है। ऐसे में डिमांड में तेजी आना स्वाभाविक है। डिमांड बढ़ने से खपत भी बढ़ेगी और इसके लिए उत्पादन बढ़ाना होगा। एक अनुमान के अनुसार स्टील की खपत में 9 फीसदी का इजाफा हो सकता है। यह आगे और भी बढ़ सकता है। सरकारी कंपनी सेल के जीएम आर.एन. रावत के अनुसार स्टील की डिमांड तो अभी से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ने लगी हैं। इसके अलावा कच्चे मालों की कीमतें भी बढ़ रही है।

गौरतलब है कि बजट में एक्साइज ड्यूटी के बढ़ने के बाद पिछले सप्ताह सेल और टाटा स्टील जैसी कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतों में 2,000 रुपये प्रति टन तक की बढ़ोतरी कर दी। आर.एन. रावत ने कहा, यह तो बाजार का नियम है। कीमतों में तो उतार-चढ़ाव का आना तो स्वाभाविक है। स्टील की कीमतें काफी लंबे समय के बाद उठना शुरू हुई है।

हालांकि बाजार एक्सपर्ट का माना है कि स्टील में 20 से 30 फीसदी की तेजी का आकलन बाजार की मौजूदा डिमांड को देखते हुए काफी ज्यादा है। मार्केट एक्सपर्ट डी. के. तनेजा के अनुसार पहले भी स्टील की कंपनियों पर मिलकर कीमतें बढ़ाने के आरोप लगते रहे हैं। अब मामला फिर उस दिशा की तरफ जा रहा है। इस बारे में सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। बाजार को मात्र बाजार शक्तियों के सहारे छोड़ना मौजूदा समय में ठीक नहीं है। (नवभारत टाइम्स)

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