कैप्टिव पावर प्लांट पर बिजली शुल्क हटाने की मांग

30 जुलाई 2010. उद्योग जगत ने कैप्टिव पावर पर मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से लगाए गए टैक्स को वापस लेने की मांग की है। राज्य सरकार ने इन प्लांटों पर आठ फीसदी का बिजली शुल्क लगा रखा है जो करीब 35 पैसे प्रति यूनिट बैठता है। इसके साथ ही 10 पैसा प्रति यूनिट की दर से ऊर्जा विकास सेस वसूला जाता है। इस तरह से कंपनियों को करीब 45 पैसे प्रति यूनिट की दर से टैक्स देना पड़ता है।

बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रदेश में कई कंपनियों ने अपने कैप्टिव पावर प्लांट लगा लिए हैं। इनमें टेक्सटाइल, सीमेंट और ऑटोमोबाइल क्षेत्र की कंपनियां भी शामिल हैं। उद्योग जगत का मानना है कि बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने की बजाय सरकार उस पर टैक्स लगा रही है। उनकी मांग है कि कैप्टिव पावर से तैयार बिजली पर लगने वाला शुल्क हटाया जाना चाहिए।

मध्य प्रदेश टेक्सटाइल मिल एसोसिएशन के सचिव एमसी रावत ने कहा, हमने राज्य सरकार से मांग की है कि कैप्टिव पावर प्लाटों को बिजली शुल्क से छूट दी जाए। मध्य प्रदेश में केवल टेक्सटाइल कंपनियों के ही करीब 35 कैप्टिव प्लांट हैं जिनकी उत्पादन क्षमता करीब 250 मेगावाट है। इसके अलावा पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में भी 38 कंपनियों ने कैप्टिव पॉवर प्लांट लगाए हैं। इसके अलावा प्रदेश की कई सीमेंट और ऑटोमोबाइल कंपनियों के ने भी ऐसे प्लांट लगा रखे हैं। इनमें से ज्यादातर प्लांट फर्नेस ऑयल और डीजल पर चलते हैं। इसके अलावा सरकार ने अपनी उद्योग नीति में भी कैप्टिव पावर प्लांटों को शामिल किया है जिन पर 5-7 साल तक प्रवेश कर से छूट की बात कही गई है।(स्रोत-दैनिक भास्कर)

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