30 जुलाई 2010: विश्व की सबसे बडी इस्पात कंपनी आर्सेलर-मित्तल ने खनन के लिए अधिग्रहण की जाने वाली भूमि के लिए आदिवासियों को इक्विटी के बजाय उचित मुआवजा दिए जाने का पक्ष लिया है.
सरकार ने ओदवासियों को खनन के लिए अधिग्रहण की जाने वाली भूमि के बदले 26 प्रतिशत इक्विटी दिए जाने का प्रस्ताव किया है.
भारत में अधिग्रहण की जाने वाली भूमि के बदले ओदवासियों को इक्विटी या मुआवजा दिए जाने को लेकर जारी बहस में अपना रुख स्पष्ट करते हुए आर्सेलरमित्तल के चेयरमैन लक्ष्मी निवास मित्तल ने कहा कि विधेयक से क्या निकलता है इसे सामने आने पर देखते हैं. इस पर काफ़ी बहस चल रही है.
वह खान मंत्रालय के इस प्रस्ताव के संबंध में सवालों को जवाब दे रहे थे. खान मंत्रालय ने खनन विधेयक के मसौदे में प्रस्ताव किया है कि देश में भूमि का अधिग्रहण करने की इच्छुक खनन कंपनियों को ओदवासियों को 26 प्रतिशत इक्िवटी या एन्युटी देनी चाहिए.
मित्तल ने कहा कि यह सकारात्मक है या नकारात्मक, इस पर टिप्पणी करना काफ़ी मुश्किल है. मगर मुङो लगता है कि इक्विटी देने के बजाय भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए.
इससे पहले खान मंत्री बीके हंडीक ने कहा था कि टाटा उद्योग घराने ने दिए गए क्षेत्र में परिचालन से होने वाले लाभ में 26 प्रतिशत हिस्सा दिए जाने के विचार का समर्थन किया है. (प्रभात खबर)
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