सोर्सिंग केपीओ

सामान्य तौर पर व्यवसाय का मुख्य बिन्दु उनकी खरीद प्रणाली तथा खरीद की श्रेणियों पर निर्भर करता है, हालांकि गैर महत्वपूर्ण श्रेणियों में भी बचत की संभावनाएं हैं। यही कारण है कि कई व्यवसाय अपनी खरीद का काम आउटसोर्सिंग के जरिए कर रहे हैं। यहीं पर हमारे सोर्सिंग केपीओ का काम शुरू होता है।

सोर्सिंग केपीओ मॉडल तीन महत्वपूर्ण कारकों पर ध्यान देता है:

  1. कुल खर्च प्रबंधन : सोर्सिंग रणनीति सहित कुल खरीददारी से भुगतान तक पर किया जाने वाला सर्वोत्तम खर्च।
  2. सोर्सिंग : चयनित श्रेणी का प्रबंधन।
  3. कारोबार की प्रक्रिया (प्रोक्योरमेंट) : कारोबार की आवश्यकता से भुगतान की प्रक्रिया तक।

सोर्सिंग की प्रक्रिया में ग्राहक की संस्था के खर्च करने के इतिहास, वस्तुओं और खर्च करने की श्रेणियों को परखा जाता है तथा उसके आधार पर सोर्सिंग की रणनीति तैयार की जाती है। सामान्य रूप से प्रत्यक्ष वस्तुओं के लिए आरएफक्यू या आरएफपी तरीके को अपनाया जाता है क्योंकि आपूर्ति करने वालों के बारे में जानकारी पता नहीं होती तथा यह प्रक्रिया वार्षिक आधार पर होती है। परोक्ष वस्तुओं के लिए, जहां मूल्य व आपूर्ति करने वाले की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, वहां ऑनलाइन रिवर्स ऑक्शन का उपयोग किया जाता है।

खर्च का विश्लेषण करने के बाद बाईजंक्शन द्वारा उपयोग की जाने वाली विधि निम्नवत हैः


  • आपूर्ति बाजार का विश्लेषण

  • आरएफपी का विकास

  • आपूर्ति करने वाले का मूल्यांकन (मूल्य को छोड़कर)

  • मूल्य का मोलभाव/ऑनलाइन रिवर्स ऑक्शन बोली लगाना

  • कुल खर्च का विश्लेषण और आपूर्ति करने वाले का चयन


बाईजंक्शन के अनुसार प्रोक्योरमेंट (ट्रांजैक्शनल प्रोक्योरमेंट आउटसोर्सिंग) जरूरत से भुगतान तक (आरटीपी) की प्रक्रिया है। यह उपभोक्ता की खरीददारी के हर कार्य (खरीददारी से भुगतान तक) में सहयोग करता है। प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया (आरटीपी) में निम्न बातें शामिल हैंः

- ऑनलाइन आवश्यकता
- स्वीकृति
- ऑनलाइन कैटलॉग / ई कैटलॉग
- पर्चेज ऑर्डर
- ऑनलाइन रीसीविंग / ई रीसीविंग
- ऑनलाइन इनवायसेस / ईइनवायसेस

आगे पढें >>

घोषणा | गोपनीयता नीति | सर्वाधिकार सुरक्षित. © 2006-2010 एमजंक्शन सर्विसेस लिमिटेड