कोलकाता . लौह और इस्पात उद्योग के हितों के लिए पूर्वी क्षेत्र के राज्यों के बीच सहयोग जरूरी है। इन राज्यों के आपसी सहयोग से ही इस्पात उद्योग और इन राज्यों का समान रूप से औद्योगिक विकास संभव हो सकेगा। एम जंक्शन और भारत चेबर ऑफ कामर्स द्वारा कोलकाता में आयोजित दो दिवसीय (12-13 मार्च-2008) स्टील कांफ्रेंस में सरकार और इस्पात उद्योग से जुड़े वक्ताओं ने ये विचार व्यक्त किये।
वक्ताओं ने कहा कि उद्योग के विकास के लिए पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, उड़ीसा व छत्तीसगढ़ के बीच सहयोग की जरूरत है। इन राज्यों के बीच प्रतियोगिता के बदले सहयोग की जरूरत है। लौह अयस्क, कोयला और बिजली जैसे संसाधनों वाले इन राज्यों में परस्पर आदान-प्रदान के जरिये उद्योग नयी ऊंचाइयों को छू सकता है।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पोस्को रिर्सच इंस्टीच्यूट के निदेशक डॉ चांग हो क्वाग ने कहा कि विरोधों के चलते जिस तरह से परियोजनाएं अधर में लटक रही हैं, उससे ऐसा नहीं लगता कि स्टील उत्पादन के लक्ष्य को पूरा किया जा सकेगा। जमीन अधिग्रहण को लेकर विरोध, लौह अयस्क की मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर से यह कार्य कठिन होता जा रहा है।
जमीन अधिग्रहण का विरोध कम करने के लिए उद्योग को अपने सामाजिक दायित्व (कार्पोरेट सोशल रिसपांसबिल्टी) के लिए आगे आना चाहिए। उत्पादन विस्तार और नयी परियोजनाओं का कार्य जमीन के अभाव में रूका पड़ा है। लोगों की सहमति लेकर ही यह कार्य पूरा हो सकता है।
वीडियोकॉन समूह के चेयरमैन वी.एन.धूत ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि स्टील की मांग भारत समेत पूरे विश्व में बढ़ रही है। इसे देखते हुए पश्चिम बंगाल के जामुड़िया में अपने प्रस्तावित स्टील संयंत्र की क्षमता उन्होंने 30 लाख टन से बढ़ाकर 60 लाख टन प्रति वर्ष करने का निर्णय लिया है। सरकार के पास इस आशय का प्रस्ताव भेजा गया है।
जेएसडब्ल्यू बंगाल स्टील के संयुक्त प्रबंध निदेशक विश्वदीप गुप्ता ने कहा कि नयी तकनीक से इस्पात संयंत्रों के लिए जमीन की जरूरत को कम किया जा सकता है। नयी तकनीक की वजह से ही पश्चिम बंगाल के सालबोनी में उनकी कंपनी मात्र 4500 एकड़ जमीन पर 10 मिलियन टन क्षमता वाला इस्पात संयंत्र लगाने जा रही है।
हैवी इंजीनियरिंग कार्पोरेशन लि. के चेयरमैन जी.के.पिल्लई ने कहा कि इस्पात से जुड़ी कंपनियों, कोयला व लौह खदानों के लिए उपकरणों के निर्माण पर उनकी कंपनी विशेष ध्यान देगी। उन्होंने कहा कि 19 वर्षों के बाद उनकी कंपनी ने पिछले वर्ष लाभ किया है। अगले पांच वर्षों में कंपनी ने 4500 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य तय किया है। इस वर्ष कंपनी द्वारा 410 करोड़ रुपये का कारोबार किये जाने की संभावना है।
सम्मेलन में झारखंड सरकार के विशेष प्रतिनिधि व राज्य मंत्री बिजेंद्र गोयल ने निवेशकों को झारखंड आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि राज्य सरकार हर तरह से उनकी मदद करेगी। उन्होंने कहा कि झारखंड अन्य राज्यों के साथ लौह अयस्क के मामले पर सहयोग के लिए तैयार है। सहयोग से ही सभी राज्यों का विकास होगा।
कोल इंडिया लि. के निदेशक (विपणन) के. रंगनाथ ने कहा कि भारत में कोयले की मांग को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं।
रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक ( रेल मूवमेंट) जी.के.मोहंती ने इस्पात क्षेत्र के लिए भारतीय रेलवे द्वारा शुरू की गयी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस मद में कुल 6600 करोड़ रुपये का निवेश किया जायेगा।
हल्दिया पोर्ट कॉम्लेक्स के प्रबंधक (प्रशासन) अमल दत्ता ने कहा कि स्टील उद्योग के लिए माल ढुलाई हेतु बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। कंजेशन चार्ज से उद्योग को काफी क्षति हो रही है। कंजेशन समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस दो दिवसीय सम्मेलन में टाटा स्टील, किचेन एप्लायेंसेस इंडिया, वीडियोकॉन, जय बालाजी, श्याम ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज, एसपीएस ग्रुप, ईएमआर इंडिया, श्याम स्टील इंडस्ट्रीज लि. टीएम इंटरनेशनल लोजिस्टिक्स, बॉलाजी कोक इंडस्ट्रीज, आधुनिक समूह, सीडीई एशिया, नियो मेटालिक्स लि. टाटा रायरसन लि. आईएनएसडीएजी एवं टिनप्लेट कंपनी ऑफ इंडिया लि. सहित 45 से अधिक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने वक्तव्य रखे।
सम्मेलन में एम जंक्शन के प्रबंध निदेशक वीरेश ओबेराय, भारत चेंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष पी.आर अग्रवाल, कांफ्रेंस चेयरमैन सीताराम शर्मा ने इस्पात उद्योग के विकास के लिए राज्यों के बीच सहयोग की जरूरत पर बल दिया।
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