खनिज नीति पर अमल अटका

11 अप्रैल, 2008। नई खनिज नीति की औपचारिक घोषणा भले ही यूपीए सरकार ने कर दी हो, लेकिन सही मायने में इसके कार्यान्वयन में अभी और वक्त लगेगा।

लिहाजा, इस नीति के जरिए लाभान्वित होने की उम्मीदें लगाए बैठी कंपनियों को फिलहाल इंतजार करना होगा। नई नीति की घोषणाओं को अमल में लाने के लिए एमएमडीआर अधिनियम में बदलाव करना होगा। इसके लिए नए सिरे से कैबिनेट नोट तैयार करना होगा। इसे हरी झंडी मिलने के बाद एक संशोधन प्रस्ताव संसद में पेश किया जाएगा।

नीति घोषित होने के बावजूद अभी तक आयरन ओर उत्पादक राज्यों की सरकारें केंद्र सरकार की ओर भौंहें ताने खड़ी हैं। उनका आरोप है कि उनके सुझावों को हाशिए पर डालते हुए सरकार ने यह नीति घोषित कर दी है। लिहाजा, उनके सुझावों को शामिल कर ही अधिनियम में बदलाव किया जाना चाहिए, अन्यथा देश की दुर्लभ खनिज संपदा का सदुपयोग असंभव हो जाएगा।

खान मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक एमएमडीआर अधिनियम में बदलाव के लिए नया कैबिनेट नोट बनेगा। इस नोट में राज्यों के सुझावों को शामिल करने का प्रयास किया जाएगा ताकि उनकी चिंताओं का निवारण किया जा सके। कैबिनेट से इसकी मंजूरी के बाद ही अधिनियम में बदलाव के लिए संसद में संशोधन प्रस्ताव पेश किया जाएगा।

नई नीति के बारे में चर्चा करते हुए खान मंत्री शीशराम ओला ने कहा कि इसके जरिए देश की खनिज संपदा के अधिकतम सदुपयोग का रास्ता साफ हो गया है। नई नीति से इस क्षेत्र में देशी-विदेशी निवेश बढ़ेगा और उत्पादन में बढ़ोतरी भी संभव हो सकेगी। कुछ दिन पहले कैबिनेट की ओर से मंजूर राष्ट्रीय खनिज नीति के तहत खनन पट्टों के आवंटन और उन्हें विकसित करने व उत्पादन को लेकर कई प्रकार की तकनीकी तथा प्रक्रियागत दिक्कतों को दूर कर दिया गया है। ( स्रोत-दैनिक जागरण)

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